मुख्यमंत्री योगी के विकास रथ में बाधा बने “भगवा उपद्रव”

सहारनपुर। एक और जहाँ भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में और देश में सब का साथ सक का विकास लाने की बात कर रहे है वही पिछले दिनों जनपद सहारनपुर में भाजपा के ही एक सांसद द्वारा सविंधान के जनक माने जानेवाले डॉ भीम राव अम्बेडकर की जबरन जयंती निकालने को लेकर हुए फसाद से पूरा देश उस वक़्त चकित रह गया जब भाजपा सांसद की मौजूदगी में इंसानियत का नंगा नाच हो रहा था और सांसद कुछ करने के बजाये भदकते हुए नजर आए. उपद्रवियों ने जनपद सहारनपुर के कमिश्नर, डी आई जी, डी एम व अन्य सभी उन अधिकारियों की गाड़ियां तक तोड़ दी जो सडक दुधली गाँव में फसाद को रोकने गए थे। प्रत्यक्ष दर्शियों के मुताबिक सबसे ज्यादा उत्पीड़न एसएसपी का किया जिनसे ना सिर्फ बदतमीज़ी की बल्कि आई पी एस ऑफिसर के आवास को घेर सुरक्षा बलों तक को बंधक बना लिया। इतना ही नही इन उपदवियों ने एसएसपी आवास की सरकारी संपत्तियों तक को नही बक्शा बंगले में लगे सीसीटीवी कैमरों, एसएसपी की नाम प्लेट व पौधों तक को भी नुकशान पहुंचाया गया.




इस शोर शराबे से एक बार को एसएसपी लव कुमार का परिवार भी हतप्रभ रह गया था की आखिर मामला है क्या..अब आप अनुमान लगाइए कि एक आईपीएस अधिकारी के बच्चे-पत्नी जो इतनी सुरक्षा में रहते है। यदि उनको डर लग सकता है तो आम आदमी का क्या होगा यह बड़ा सवाल है. सांसद द्वारा एसएसपी का अमर्यादित विरोध और प्रदर्शन करना निंदनीय रहा जिसकी भाजपा समेत सभी अन्य दलों के नेताओं ओर विभिन्न प्रकार के समाजसेवियों ने भी सांसद की निंदा की है। एक जिम्मेदार भरे पद पर रहकर समाज़ को तोड़ने का जो कार्य सांसद ने किया। उससे पूरे देश के आई पी एस अधिकरियों में रोष पनप गया है। इतना सब कुछ सहने के बाद भी एसएसपी लव कुमार ने अपने ऊपर संयम रखा। और आलाधिकारियों के साथ मिलकर रात के 4 बजे तक जनपद सहारनपुर की सड़कों पर स्थिति का जायजा लेते रहे। एक एसएसपी जनपद का वह जिम्मेदार अधिकारी होता है। जिसको समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना पड़ता है। सभी वर्गों पर एक आई पी एस अफसर बिना भेद भाव के कार्यवाही कराते है। लेकिन जनपद सहारनपुर को सांसद राघव लखन पाल जिस मंसूबों की ओर मोड़ना चाह रहे थे उसको जनपद के प्रसाशन ने अपनी जानपर खेल कर सफल नही होने दिया।

नही बख्शा मीडियायकर्मियों को भी।
जिस मीडिया का भारत का सविंधान ओर कानून सम्मान करता है। जिस मीडिया को भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सम्मान करते है। उसी मीडिया के साथ खुले तौर पर विरोध कर पिटाई तक कर डाली। मीडियाकर्मियों की गाड़ियां ,कैमरे यहां तक कि मोबाइल भी नही बक्शे। मीडिया के साथ मारपिटाई होने की इस स्थिति में जनपद के सभी पत्रकारों में रोष व्याप्त है। जनपद को नफरत की इस आग में झोंकने का जो काम किया गया है। उसके इंसाफी कार्यवाही के लिए सभी की निगाहें हाईकमान पर टिकी हुई है। कि आखिर हाई कमान क्या कार्यवाही अपने सांसद पर करते है। और एसएसपी सहित सभी अधिकारियों व पीड़ितों को इंसाफ देते है।




कहाँ गया भाजपा का चुनावी नारा “न गुंडाराज,ना भृष्टाचार”

विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने न गुंडाराज,ना भृष्टाचार का नारा खूब ज़ोरशोर से लगाया था। लेकिन भाजपा अपने इस मुद्दे को ज्यादा दिनों कायम ना रख पाई ,प्रदेश भर में पहले गौ-कसी के नाम पर पुलिस प्रसासन की नाक के नीचे हर रोज तांडव खेला गया। औऱ आम आदमियों व व्यापारियों को पीटा गया। वहीं से होंसला लिए यह संरक्षक प्राप्त उपद्रविय अब उच्च स्तरीय अधिकारियों तक को नही बक्श रहे है। जिसका जीता जागता उदाहरण जनपद सहारनपुर में हुआ फसाद ओर इंसानियत का हुआ नंगनाच उनमे से एक है यदि एक जनपद का एसएसपी स्तरीय परिवार तक सुरक्षित नही है औऱ अपनी जान बचाने के लिए एक गाय के छप्पर में छिपकर अपनी जान बचाने को मजबूर हो सकता है तो आम आदमियों का परिवार कैसे सुरक्षित रह पाएगा।

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