पीने के पानी की बूंद बूंद को तरस गये मंडी में अन्न लाने वाले अन्नदाता

गंगोह-नवीन मंडी स्थल पर पीने के पानी का बंदोबस्त न होने से किसान, मजदूर व व्यापारियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड रहा है। किसानों के अलावा उनके पशुओं तक के लिए मंडी में कोई व्यवस्था नही है। ऐसी हालत तब है जबकि गंगोह मंडी का पश्चिमी उतर प्रदेश की मंडियों में राजस्व वसूली के दृष्टिगत प्रथम स्थान है।

इतना ही नही एसडीएम भी कई बार मंडी को शुद्ध पेय जल की व्यवस्था कराने को बार बार निर्देशित कर चुके है।
गौरतलब है कि मंडी स्थल पर अन्नदाताओं के लिए शुद्ध पीने के पानी के लिए रिकार्ड में तो वाटर टैंक और आधा दर्जन से ज्यादा हैंड पम्प लगे है। मगर मौके पर एक भी हैंड पम्प चालू हालत में नही है।




मगर टंकी का पानी पीने काबिल नही रह गया है। मंडी से सम्बद्ध लोगों राजेश कुमार, राजकुमार प्रजापति, प्रताप सिंह, रमेश चंद, धनेन्द्र गर्ग, राजेन्द्र कुमार, कृष्ण लाल, बलबीर सिंह व किसानों मुल्की बालू, विकास मुबारिकपुर, अमरीश खैरसाल, रियासत बालू, विजेन्द्र गांधीनगर आदि के अनुसार मंडी के तमाम हैंडपम्प सालों से खराब पडे है। बताया जाता है कि वाटर टैंक की सफाई न हो पाने से उसमें पक्षियों के शव पडे सड रहे है। जिससे उसका पानी पीने के काबिल नही रह गया है। किसानों के पशुओं के लिए भी पीने के समुचित प्रबन्ध नही किये गये है।




मंडी में एक मात्र हैंडपम्प चालू हाल में है। जिसे व्यापारियों ने अपने पैसे से जनहित में लगवाया। जिससे पूरी मंडी के दुकानदार व किसानों को पानी मिल पा रहा है। पीने के पानी का प्रबन्ध न होने के बारे भाकियू व किसानों ने एसडीएम से मंडी का सभापति होने के नाते शिकायत की तो उपजिलाधिकारी श्मशाद हुसैन ने मंडी सचिव को अप्रैल माह में गेंहू का सीजन शुरु होते ही हैंड पम्पों को ठीक करवाने अन्यथा मंडी में चारों कोनों पर मिट्टी के मटके रखवाने के निर्देश दिये थे। मगर मंडी अधिकारियों ने मंडी के मेन गेट पर एक मटका रखवाकर अपने कार्य की इतिश्री कर ली।



व्यापार मंडल नेताओं मोल्हडमल गर्ग, चै. सोरण सिंह, प्रदीप तायल, रामगोपाल सिंघल, योगेश गर्ग, ब्रजेश सैनी ने कहा है कि किसानों के लिए मंडियों में अन्य मंडियों के समान वाटर कूलर लगवाने की मांग की है। इस बारे मंडी सचिव ब्रजपाल सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मंडी के हैंडपम्पों के खराब होने की सूचना उच्चाधिकारियों को भिजवा रखी है। मगर अभी तक कोई बजट उपलब्ध नही कराया गया है।



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