सावधान। यदि कोई भी लाइसेंस आपको बनवाना है तो देना होगा सेवा शुल्क नही तो काटते रहिए नगर निगम के चक्कर

सहारनपुर। यदि सहारनपुर नगर निगम को रिश्वतखोरी के मामले में पहले नम्बर की उपाधि देनी पड़े तो इसमें कोई बुराई नही है।

क्योंकि यहाँ हर-रोज़ रिश्वतखोरी के मामले खुलते रहते है। कुछ नामचीन अधिकारियों से लेकर बाबू तक पूरी तरह रिश्वतखोरी में लिप्त है। सूत्रों ने बताया कि जिस फ़ाइल में चढ़वा नही आता उस फाइल को यह लोग घुमाते रहते है। जिससे थकहार कर फरियादी को चढ़वा चढ़ाना ही पड़ता है।




ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है कि दिल्ली रोड स्थित एक मीट व्यापारी ने बताया की उसने नगर निगम से लाइसेंस बनवा लिया था।
लेकिन कुछ दिनों पहले फ़ूड खाद्यय विभाग की एक टीम सर्वे के लिए आई औऱ फ़ूड लाइसेंस के नवीनीकरण कराने की बात कह गई जिसके लिए टीम ने नगर निगम से एनओसी लगाने की बात भी कही।




मीट व्यापारी का कहना है कि इस मामले में वह दिलशाद नाम के एक बाबू से मिला जिसने व्यापारी के सभी कागजातों की पूरी फ़ाइल एक हफ्ते अपने पास रख कर व्यापारी को वापस लौटा दी। और कहने लगा कि इसमें जांच होगी एनओसी ऐसे नही मिलेगी।
व्यापारी ने बताया कि वही ओर खड़े नगर निगम के एक चपरासी ने कहा कि 1500/- रुपये दोगे तो कल ही को एनओसी प्राप्त हो जाएगी।
व्यापारी ने पैसे देने से मना कर नगर आयुक्त से मिला तो नवनियुक्त नगर आयुक्त ने दिलशाद नाम के बाबू को बुलाना चाहा तो उस वक्त स्वास्थ्य अधिकारी डॉ रमन ने कहा कि मैं देख लेता हूँ । ओर व्यापारी से पूरी फ़ाइल की एक फोटो कॉपी अपने पास रख ली।
इस बात को पूरे 15 दिन गुज़र जाने के बाद भी जब व्यापारी की एन ओ सी नही प्राप्त हुई। तो व्यापारी ने डॉ रमन से मुलाकात की जहां डॉ ने यह कह कर मामला टरका दिया कि कलीम नाम के किसी व्यक्ति ने अभी की फ़ाइल नही दी है। जब आएगी तब मालूम कर लेना




*👉यानी के यदि व्यापारी 1500/- रुपये दे देता तो उसको एनओसी 2 दिन में प्राप्त हो जाती।*

*👉औऱ यदि नही दिए तो 30 दिन से भी ऊपर हो गए। अभी तक एनओसी नही मिली।*

*👉इस बारे में जब हमने नगर आयुक्त से पता कराना चाहा तो उन्होंने फोन नही उठाया।*

यानि के यह साफ है कि मोदी और योगी सरकार के सख्त आदेश के बाद भी नगर निगम सहारनपुर में भृष्टाचार अपने चर्म सीमा पर चल रहा है।

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