You are here
Home > उत्तर प्रदेश > सहारनपुर की घटना के बाद भीम आर्मी ने हिला दी दिल्ली, हिला दी राजनीति

सहारनपुर की घटना के बाद भीम आर्मी ने हिला दी दिल्ली, हिला दी राजनीति

भीम आर्मी,bheem army

सहारनपुर- यूपी के सबसे शांत जिलों में सुमार सहारनपुर में राजपूतों और दलितों के बीच हुई हिंसक घटनाओं के बाद भीम आर्मी पुरे देश भर में चर्चा में है.भीम आर्मी सेना के नाम से लोगों को कन्फ़्यूजन भी हो सकता है. और सेना नाम से आर्मी का मतलब भी निकाला जाता है.
लेकिन इस भीम आर्मी सेना संगठन से जुड़े लोग संविधान के दायरे में रहकर काम करने और कराने की बात करते हैं. दलितों और पिछड़ों को संगठित करने की बात करते हैं.

भीम आर्मी  प्रदर्शन
भीम आर्मी प्रदर्शन

मेरा मानना है कि यदि ऐसी समानांतर सेनाएं खड़ी होने लगेंगी और ये ज्यादा उग्र तरीके से काम करेंगी तो लोकतंत्र के लिए अलग ढंग से चुनौती खड़ी हो सकती है. सरकार को दलितों की शिकायत की समस्याओं के बुनियाद में जाने की जरूरत है.




सरकार को यह सोचने की जरूरत है कि आखिर किन वजहों से दलित ऐसे उग्र संगठनों का गठन कर रहे हैं. और इसकी वजह किया है.
अगर बात करें दलितों के हितों के लिए हमेशा काम करने का दावा करने वाली बड़ी पार्टियां कि तो वह पार्टियाँ अपनी प्रासंगिकता खो चुकी हैं. ऐसी पार्टियाँ केवल सिर्फ सत्ता की राजनीति में उलझ कर रह गई हैं. इसी एक वजह से दलित आबादी के साथ हो रही लगातार बदसलूकी और राजनीती में अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ ऐसे संघटनो का गठन किया जा रहा है, लेकिन अभी तक दलित समाज को कोई जुबान नहीं मिल पा रही है जो उनके लिए समानता का अधिकार ला सके.

दलितों में पनपते आक्रोश कि दूसरी वजह ये है कि वह पूरे देश में केवल एक ही एक तरह का वातावरण बन रहा है और दलित उस वातावरण के शिकार हो रहे है, तीसरी चीज़ यह भी है कि कुछ लोग खुद को डॉक्टर भीम राव आंबेडकर का वारिस तो बता रहे हैं लेकिन वह दलितों के लिए कुछ भी करने से बच रहे हैं.




आखिर क्या मांग है भीम आर्मी कि और इसके संस्थापकों कि
सहारनपुर से दिल्ली में कूच करने आई भीम सेना के प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सहारनपुर हिंसा के बाद अगड़ी जाति के लोगों को प्रसाशन द्वारा हथियारों के साथ प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई जबकि दलितों को गाँधी पार्क में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से भी रोका गया.और उसके अवज में दलितों पर लाठी चार्ज किया गया, इतना ही नही पपर्दर्शन क्र रहे भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं पर भगवाधारियों ने हमला भी किया




भीम आर्मी के संस्थापकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने नीले रंग के कपडे वालों को दुकानों से उठा उठा कर बुरी तरह पीट कर जेल में भर दिया प्रशासन और सरकार के स्तर पर ये दोहरा बर्ताव दिख रहा है. इसी जनांदोलन और इन संगठनों के रूप में दलितों का जो उभार हो रहा है, उससे राजनीतिक दल अपने तौर तरीकों में बदलाव लाने पर विवश होंगे. और उनकी आँखे खुलेंगी नही तो दलित उन दलित नेताओं और पार्टियों का ही बहिष्कार कर देंगे




भीम आर्मी  प्रदर्शन
भीम आर्मी प्रदर्शन

दूसरी चीज़ भीम आर्मी के संस्थापक सी आज़ाद रावण का आरोप है कि देश भर में दलितों के साथ जो कुछ हो रहा है, भीम सेना केवल उसका एक हिस्सा है.दलितों के ऊपर गुजरात में गाय के नाम पर दलितों के साथ भगवाधारियों ने जो कथित ज़्यादतियां कि है वह किसी से नही छिपी है. इन सभी घटनाओं से दलित उग्र विरोध करने पर विवश हो रहे हैं, फिर ये मामले चाहे गुजरात या फिर झारखंड के हों या उत्तर प्रदेश. भीम आर्मी का विरोध अलग-अलग स्तरों पर दिख रहा है और इसी के कारण मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां अपने नीति बदलने पर मजबूर होंगी.




आपको बता दें कि हाल ही में यूपी के सहारनपुर की घटना के बाद पैदा हुआ दलितों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी का नतीजा है कि कल रविवार में लाखों की तादात में जंतर-मंतर पर युवा और आमलोग इकट्टे हुए हैं। इन सभी ने सहारनपुर में दलितों को न्याय दिलाने और पुलिस द्वारा भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण के खिलाफ झूठे केस दर्ज करने व् भीम आर्मी को फर्जी संगठन बता कर उसको नक्सली घोषित कराने के खिलाफ प्रदर्शन किया




बसपा सुप्रीमों मायवती का कल सहारनपुर दौरा-

दिल्ली में भीम आर्मी के उग्र प्रदर्शन के बाद अब बसपा सुप्रीमों ने भी दलितों कि और अपना रुझान किया है वह सहारनपुर के श्ब्बीरपुर गाँव प्रकरण में जले 50 से अधिक घरों और महिलाओं के साथ हुए उत्पीडन के अवज में बसपा सुप्रीमो व् पूर्व उत्तर प्रदेश कि मुख्यमंत्री रही कु मायावती कल दिल्ली के रस्ते सहारनपुर पहुंच रही है और शब्बीर पुर गाँव में जाकर पीड़ित दलितों से मिलेंगी, इसके लिए प्रसाशन आनन फानन में पूरी तैयारी में लग गया है

Comments

comments

Leave a Reply

Top
error: Content is protected !!