ज़िले का कप्तान बदल सकता है, एस पी बदल सकता है क्षेत्रीय अधिकारी से लेकर थानेदार बदल सकता है,,,,,लेकिन नही बदलता तो थाने का सिपाही,,?

सहारनपुर- क्यों है ना अटपटा की जब ज़िले के कप्तान का तबादला हो सकता है, एस पी एवं क्षेत्रीय अधिकारी से लेकर थानेदार बदल सकता है तो क्यों एक थानें में 3 साल से ऊपर के सिपाही मुंशियों के तबादले नही होते,,,?

वैसे तो इस महकमे की यह सबसे छोटी कड़ी मानी जाती है लेकिन इनके क्षेत्र में कहाँ दाल बिकती है ……और कहाँ मलाई,,,,सब जानते है थाने में मौज मारते ,,,,,सिपाही।




सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर अगर बात करें पिछली कुछ घटनाओं की तो थानों में जमे मुंशियों व सिपाहियों के रवैया अपने सीनियर के प्रति इतने अजीब है कि सीधे मुंह नए या पुराने थानेदार से बात तक नही करते है। जिसको लेकर तो कुछ थानों में तू तू ,,,,मैं मैं भी हो चुकी है। और साप्ताहिक व मासिक बंधे सामाजिक कार्यों के लिए तो महकमे के इस निचला स्तर में बहुत ही मज़बूत पकड रहती है। कब और कहाँ किस किस मुहल्ले में जाकर सामाजिक कार्यों को करना है। इन्हें अच्छे से मालूम रहता है।




बहरहाल, अब इसमें अहम बात तो यह है कि जब एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लेकर महकमे का हर बड़ा छोटा अधिकारी तबादलों से बदल सकता है तो आखिर क्यों यह रिजर्वेशन के भोगी कैसे अभी तक 5-6-10 सालों से थानों डटे पड़े है,,,? क्यों अभी तक बन चुकी इस नई परम्परा को किसी वरिष्ठ अधिकारी ने नही तोड़ी,,?



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